Pan Card Rules Update: भारत में पैन कार्ड हर नागरिक की वित्तीय पहचान का सबसे अहम दस्तावेज माना जाता है। बैंक खाता खोलने से लेकर आयकर रिटर्न भरने, निवेश करने और बड़े लेनदेन तक, हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है। अब आयकर विभाग ने 2025 में पैन कार्ड से जुड़े कुछ नए नियम लागू किए हैं जो हर टैक्सपेयर, छात्र, व्यवसायी और एनआरआई के लिए जानना बेहद जरूरी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इन नए नियमों में क्या बदलाव किए गए हैं और उनका आप पर क्या असर पड़ेगा।
पैन और आधार लिंक करना अनिवार्य
सरकार ने सभी नागरिकों के लिए पैन को आधार से लिंक करना अब पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। यदि कोई व्यक्ति तय तिथि तक लिंक नहीं करता है तो उसका पैन निष्क्रिय हो जाएगा। निष्क्रिय पैन से आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकेगा। बैंकिंग लेनदेन रुक सकते हैं और टीडीएस की दरें बढ़ सकती हैं। साथ ही नया बैंक खाता या डिमैट खाता खोलना भी संभव नहीं होगा। अच्छी बात यह है कि पैन को दोबारा सक्रिय कराया जा सकता है। आधार से लिंक करने और जुर्माना भरने के बाद लगभग 30 दिनों में यह फिर से चालू हो जाएगा। इसलिए जितनी जल्दी लिंकिंग प्रक्रिया पूरी करेंगे, उतना ही बेहतर रहेगा।
व्यवसायों के लिए पैन बना यूनिवर्सल आईडी
अब सरकार ने पैन को यूनिवर्सल बिजनेस आइडेंटिफिकेशन नंबर के रूप में लागू किया है। इसका मतलब है कि अब किसी कंपनी या प्रोफेशनल को अलग अलग विभागों में अलग पंजीकरण नंबर लेने की जरूरत नहीं है। एक ही पैन नंबर से जीएसटी रजिस्ट्रेशन, ईपीएफओ, ईएसआईसी, बैंक खाता खोलने और अन्य लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकेंगी। इससे व्यवसायों के लिए अनुपालन आसान होगा और सरकारी डेटा में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
पैन धारकों के लिए नया केवाईसी नियम
नए नियमों के तहत अब हर पैन धारक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी व्यक्तिगत जानकारी अपडेट है। इसमें निम्न जानकारी शामिल है – वर्तमान पता सही होना चाहिए, मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए, ईमेल आईडी अपडेट होना चाहिए, नाम, जन्मतिथि या वैवाहिक स्थिति में बदलाव हो तो सुधार कराया जाए, पेशा या व्यवसाय से जुड़ी जानकारी सही दर्ज हो। यदि पैन की जानकारी आधार या बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती तो पैन अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। इसलिए सभी जानकारी समय पर अपडेट रखना जरूरी है ताकि लेनदेन और टैक्स प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
बड़े लेनदेन पर पैन जरूरी
अब सरकार ने कई उच्च मूल्य वाले लेनदेन पर पैन नंबर को अनिवार्य कर दिया है –
- सालाना बीस लाख रुपये से अधिक बैंक जमा पर
- पचास हजार रुपये से अधिक नकद निकासी पर
- पचास हजार रुपये से अधिक क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान पर
- दो लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण खरीदने पर
- म्यूचुअल फंड, शेयर निवेश और विदेशी लेनदेन पर भी पैन आवश्यक है।