Old Pension Scheme 2025: केंद्र सरकार बड़ा पुराना पेंशन हुआ लागू 24 लाख कर्मचारियों को खुशखबरी

Old Pension Scheme 2025: भारत में सरकारी कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना को लेकर एक बार फिर उम्मीद की किरण जागी है। 2025 के अंत तक लगभग 24 लाख कर्मचारियों को इस योजना से जुड़ी बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। कई राज्यों ने अपने स्तर पर इस योजना को बहाल किया है और अब केंद्र सरकार पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि ओल्ड पेंशन स्कीम ही उनके भविष्य की सच्ची आर्थिक सुरक्षा है, जबकि सरकार राजकोषीय बोझ को लेकर चिंतित है।

पुरानी पेंशन योजना क्या है?

पुरानी पेंशन योजना एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद अपने अंतिम वेतन का पचास प्रतिशत पेंशन के रूप में पाते थे। इस योजना में कर्मचारी को अपने वेतन से कोई अंशदान नहीं देना पड़ता था। सरकार पूरी जिम्मेदारी खुद उठाती थी और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता भी दिया जाता था जिससे उनकी आय समय के साथ बढ़ती रहती थी। यही कारण है कि कर्मचारी इस व्यवस्था को सबसे भरोसेमंद मानते हैं क्योंकि इससे बुढ़ापे में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।

नई पेंशन योजना और कर्मचारियों की नाराजगी

साल 2004 में नई पेंशन योजना लागू होने के बाद से कर्मचारियों को अपने वेतन का दस प्रतिशत अंशदान करना पड़ता है और सरकार चौदह प्रतिशत योगदान देती है। यह राशि शेयर बाजार में निवेश की जाती है और सेवानिवृत्ति के समय इसका मूल्य बाजार के उतार चढ़ाव पर निर्भर करता है। यही असुरक्षा कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता है क्योंकि उन्हें यह भरोसा नहीं होता कि सेवानिवृत्ति के बाद कितनी पेंशन मिलेगी। इसी कारण वे पुरानी पेंशन स्कीम को वापस लाने की मांग कर रहे हैं।

केंद्र सरकार की स्थिति और यूनिफाइड पेंशन स्कीम

केंद्र सरकार ने अगस्त 2025 में संसद में स्पष्ट किया कि फिलहाल ओल्ड पेंशन स्कीम को बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसके स्थान पर सरकार ने एक अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस लागू की है। यह योजना पुरानी और नई दोनों योजनाओं की विशेषताओं को जोड़कर बनाई गई है। यूपीएस के तहत पच्चीस वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को उनके अंतिम बारह महीनों के औसत वेतन का पचास प्रतिशत गारंटीड पेंशन मिलेगा। साथ ही महंगाई राहत का लाभ भी दिया जाएगा।

राज्यों में ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली

राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू कर दी है। इन राज्यों की सरकारों ने चुनावी वादों को पूरा करते हुए यह कदम उठाया है। अब इन राज्यों के सरकारी कर्मचारियों को बाजार से जुड़े जोखिम से मुक्ति मिलेगी। हालांकि आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राज्यों पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा और भविष्य में विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। फिर भी, कर्मचारियों के लिए यह राहत की बड़ी खबर है क्योंकि अब उनके बुढ़ापे की चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया जिसके अनुसार वे कर्मचारी जिनकी भर्ती अधिसूचना पहली जनवरी 2004 से पहले जारी हुई थी, उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है जिनकी नियुक्ति देरी से हुई थी लेकिन उन्होंने आवेदन पुरानी नीति के तहत किया था। इस फैसले के बाद कई राज्यों में पुराने मामलों की समीक्षा की जा रही है और पात्र कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

आर्थिक चुनौतियां और आगे की संभावनाएं

सरकार का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना राजकोष पर भारी बोझ डालती है और लंबे समय में अस्थिर हो जाती है। वहीं कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बुढ़ापे में सुरक्षित आय हर कर्मचारी का अधिकार है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में केंद्र सरकार को इस विषय पर कोई संतुलित समाधान निकालना होगा। संभव है कि यूनिफाइड पेंशन स्कीम में सुधार कर इसे और आकर्षक बनाया जाए ताकि कर्मचारियों को भरोसा मिल सके और सरकार की वित्तीय स्थिति भी संतुलित बनी रहे।

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