Mustard Oil New Rate 2025: सरसों तेल के दामों में हुआ भारी गिरावट, ₹100 प्रति लीटर तक सस्ता हुआ, जानिए आज का नया भाव

सरसों तेल के दाम में भारी गिरावट, ₹60 लीटर तक पहुंची कीमत, जानें आपके शहर में नया रेट Mustard Oil New Rate 2025!

 

Mustard Oil New Rate 2025: त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले ही उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देशभर में सरसों तेल के दामों में बड़ी कमी दर्ज की गई है। जो तेल पिछले महीनों तक ₹120–₹130 प्रति लीटर के बीच बिक रहा था, वह अब घटकर ₹58 से ₹68 प्रति लीटर तक आ गया है। यह गिरावट आम परिवारों के बजट को काफी राहत देने वाली है, हालांकि किसानों और व्यापारियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है।

सरसों तेल देश के अधिकांश घरों में रोज इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर हर परिवार पर पड़ता है। आइए जानते हैं इस बड़ी गिरावट के पीछे के कारण और आपके शहरों में सरसों तेल का नया रेट क्या चल रहा है।

सरसों तेल के दामों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों?

पिछले कुछ हफ्तों में देश के कई राज्यों में सरसों तेल के दामों में ₹5 से ₹10 प्रति लीटर की कमी देखी गई है। कई स्थानों पर यह कीमत पिछले एक साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है।

प्रमुख शहरों में सरसों तेल का नया रेट

दिल्ली: ₹66 प्रति लीटर

लखनऊ: ₹63 प्रति लीटर

जयपुर: ₹60 प्रति लीटर

पटना: ₹58 प्रति लीटर

भोपाल: ₹61 प्रति लीटर

कोलकाता: ₹68 प्रति लीटर

ये कीमतें ब्रांड, पैकिंग, क्वालिटी और स्थानीय बाजार परिस्थिति के अनुसार थोड़ा-बहुत बदल सकती हैं।

कीमतों में गिरावट के पीछे मुख्य कारण

सरसों तेल के रेट में आई भारी गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई बड़े कारकों का संयुक्त परिणाम है।

 

1. रिकॉर्ड उत्पादन

इस वर्ष सरसों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

उत्पादन = अधिक

मंडियों में आवक = अधिक

सप्लाई बढ़ने से कीमतें स्वाभाविक रूप से नीचे आ गईं।

 

कई राज्यों में किसान अपनी सरसों की फसल को बड़ी मात्रा में बेच रहे हैं, जिससे बाजार में स्टॉक अधिक हो गया और तेल के दाम नीचे आ गए।

2. इंडोनेशिया और मलेशिया से आयातित सस्ते तेल

विदेशी बाजारों से आयात होने वाला पाम ऑयल और रिफाइंड तेल इस समय बहुत सस्ता मिल रहा है।

सस्ता आयातित तेल आने से सरसों तेल की मांग में गिरावट आ गई।

जब मांग कम और सप्लाई ज्यादा हो, तो कीमतें गिरना स्वाभाविक है।

3. सरकारी नीतियों का सीधा प्रभाव

कीमत नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए:

आयात शुल्क में कमी

खाद्य तेलों के स्टॉक पर निगरानी

भंडारण पर सख्ती

तेजी से बढ़ती खुदरा कीमतों को स्थिर करने की नीति

इन कदमों ने कुल मिलाकर सरसों तेल के बाजार में गिरावट को और तेज कर दिया।

किसानों और व्यापारियों के लिए मुश्किल भरा समय

जहाँ उपभोक्ता कम दामों से खुश हैं, वहीं किसानों की चिंता बढ़ गई है।

सरसों की फसल को सही मूल्य न मिलने से किसान आर्थिक तनाव झेल रहे हैं।

किसानों पर सीधा असर

मंडियों में दाम कम

उत्पादन लागत की भरपाई नहीं

अगले सीजन में सरसों की खेती कम करने का मन

यदि यही स्थिति जारी रही तो अगले वर्ष सरसों उत्पादन कम हो सकता है, जिससे भविष्य में कीमतें फिर बढ़ सकती हैं।

व्यापारी भी परेशानी में

थोक व्यापारियों का स्टॉक धीरे-धीरे निकल रहा है

लंबे समय तक भंडारण करने पर नुकसान की आशंका

मिल मालिकों का मार्जिन कमl

इस माहौल ने बाजार को काफी अस्थिर बना दिया है।

उपभोक्ताओं के लिए राहत और फायदे

सरसों तेल की कीमतों में अभी जो गिरावट आई है, उससे घरेलू बजट पर बड़ा फर्क पड़ रहा है।

त्योहारी सीजन में मिठाइयाँ, नमकीन और पकवान बनाने की माँग बढ़ जाती है, ऐसे में सस्ता तेल मिलना उपभोक्ताओं के लिए बहुत फायदेमंद है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ हफ्तों तक सरसों तेल की कीमतें ₹60–₹65 प्रति लीटर के बीच स्थिर रह सकती हैं। ऐसे में अभी सरसों तेल खरीदना और स्टॉक करना भी समझदारी भरा कदम हो सकता है।

सरकारी नीतियाँ और बाजार का संतुलन

सरकार खाद्य तेल के बाजार पर लगातार नजर रख रही है।

तेल कंपनियाँ और व्यापारी नियमित रूप से स्टॉक की जानकारी दे रहे हैं।

सरकारी फैसलों के प्रमुख उद्देश्य:

कीमत स्थिर रखना

उपभोक्ताओं को राहत देना

आवश्यक वस्तुओं का सही वितरण

मांग-आपूर्ति का संतुलन

हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरसों पर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) में सुधार की आवश्यकता है, ताकि किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पा सकें।

आने वाले समय में कीमतें क्या रहेंगी?

फिलहाल कीमतों के और नीचे जाने की संभावना काफी कम है।

बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में रेट ₹60–₹65 के आसपास रह सकते हैं।

कीमतों को प्रभावित करने वाले आगामी कारक:

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव

बढ़ती घरेलू खपत

मौसम में अचानक बदलाव

त्योहारी सीजन की मांग

 

इसलिए उपभोक्ताओं को अभी के रेट का फायदा उठाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक सरसों तेल इतनी कम कीमत पर बने रहना मुश्किल है।

 

निष्कर्ष:

सरसों तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी है, लेकिन किसानों और व्यापारियों के लिए यह चिंता का विषय है। सरकार को बाजार में संतुलन बनाने की आवश्यकता है ताकि उपभोक्ताओं को सस्ता तेल मिलता रहे और किसानों को फसल का उचित मूल्य भी मिले।

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